Welcome

Website counter
website hit counter
website hit counters

Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter

Saturday, February 11, 2012

स्पेक्ट्रम नीलामी की तर्ज पर अब कोल ब्लॉक की भी बोली लगेगी!


स्पेक्ट्रम नीलामी की तर्ज पर अब कोल ब्लॉक की भी बोली लगेगी!
2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए हैं उन्हें टेलिकॉम विभाग लाइसेंस रद्द करने की चिट्ठी भेज सकता है।

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास


स्पेक्ट्रम नीलामी की तर्ज पर अब कोल ब्लॉक की भी बोली लगेगीसरकार ने बिजली क्षेत्र की कंपनियों को निजी इस्तेमाल के लिए कोयला ब्लॉक के आवंटन की नीलामी में शामिल नहीं होने की छूट दी है। । इस बारे में सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं।दूसरी ओर,2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए हैं उन्हें टेलिकॉम विभाग लाइसेंस रद्द करने की चिट्ठी भेज सकता है। 2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा के लिए टेलिकॉम विभाग के अधिकारियों ने बैठक की।

इस बैठक में रद्द किए गए 122 लाइसेंसों की फीस वापस करने पर चर्चा हुई। ये भी खबर है कि टेलीकॉम विभाग आईएमईआई नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूल सकता है। आईएमईआई नियमों का उल्लंघन करने वाले ऑपरेटर्स को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा।


इस बीच  आईआईपी में महत्वपूर्ण भागीदारी वाले विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर दिसम्बर में मात्र 1.8 फीसदी थी, जबकि खनन क्षेत्र में 3.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। विद्युत उत्पादन में 9.1 फीसदी की वृद्धि रही।कई करोड़ के खनन घोटाले में सीबीआई जांच कराने की जनहित याचिका पर उड़ीसा हाई कोर्ट का फैसला अभी आना बाकी वहीँ एक नए याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट अपील की है कि राज्य सरकार लंबित याचिकाओं पर फैसला आने से पहले नए खनन लाइसेंस जारी करने में नियंत्रण रखे!सेंट्रल एमपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने कर्नाटक की 49 कपंनियों के माइनिंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है।कमेटी ने कर्नाटक में चल रहे गैरकानूनी आयरन ओर खनन को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है। कमेटी ने कर्नाटक के 3 जिलों - बेल्लारी, तुमकुर और चित्रदुर्ग जिलों में सर्वे किया और पाया की कई जगह अवैध खनन किया जा रहा है।


एक अहम फैसला लेते हुए सरकार ने बिजली क्षेत्र की कंपनियों को निजी इस्तेमाल के लिए कोयला ब्लॉक के आवंटन की नीलामी में शामिल नहीं होने की छूट दी है। हालांकि गैर बिजली क्षेत्र की कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली लगानी होगी। फिलहाल अंतरमंत्रालयीय समिति की सिफारिशों के आधार पर निजी क्षेत्र की कंपनियों को कोयलेके ब्लॉक आवंटित किए जाते हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से कोयला आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।इसके अलावा  जमीन अधिग्रहण विधेयक जल्द ही कानून में तब्दील हो जाएगा। इसका अर्थ यह होगा कि जमीन का अधिग्रहण करने से पहले दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी हो या न बनी हो, अधिग्रहीत जमीन के मालिकों को मुआवजा दिया जाएगा। इसलिए किसी भी सूरत में बगैर किसी विवाद और देरी के जमीन का अधिग्रहण सुनिश्चित हो जाएगा।नई खनन नीति लागू करने की दशा में कोयला खानों में उत्खनन के लिए ऐसे हाल में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए,ऐसा विशेष ​​जानकारों का मानना है।

खनन विधेयक भी जमीन अधिग्रहण विधेयक के साथ-साथ कानून की शक्ल लेने वाला है। इसके जरिये पहली बार उन लोगों को मान्यता मिली है, जिनकी जमीन खनिजों की निकासी के लिए ले ली गई है। खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं होती, बल्कि इस काम के लिए जमीन पट्टे पर ली जाती है। नए कानून में यह व्यवस्था नहीं बदली जाएगी। इस हकीकत को छोड़कर कि इस मामले में मुनाफे को साझा किया जाएगा।


सरकार का कहना है कि पारदशिर्ता लाने के लिए ये कदम उठाया गया है। केंद सरकार कोल माइन की न्यूनतम कीमत तय करेगी इसके बाद कंपनियों की बोली मंगाई जाएगी और सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को कोल ब्लाक दिया जाएगा।


इससे पहले कोल ब्लॉक बिना किसी बिडिंग के सिर्फ स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर कंपनियों को बांटा जाता था। दरअसल 2जी लाइसेंस को लेकर पहले आओ पहले पाओ की नीति पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल उठाने के बाद केंद्र सरकार काफी सतर्क हो गई है।


कोयला मंत्रालय का कहना है कि वो जल्द ही राज्य सरकारों को उन क्षेत्रों की जानकारी देगी जहां कोयले का भंडार है इसके अलावा राज्यों को इन खदानों का रिजर्व प्राइस भी बताया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार योग्यता और बोली के आधार पर कंपनी या कॉर्पोरेशन का चुनाव करेगी।


पहले चरण के तहत बिजली और गैर-बिजली क्षेत्र की कंपनियों को 54 ब्लॉक की पेशकश की जाएगी।


नई प्रक्रिया के तहत गैर-बिजली क्षेत्र की कंपनियों को नीलामी के जरिये कोयला ब्लॉक आवंटित किए जाएंगे, जबकि बिजली क्षेत्र की कंपनियों को ब्लॉक से जुड़े संयंत्र से उत्पादित बिजली की कीमत  के आधार पर आवंटन किया जाएगा।


हालांकि बिजली कंपनियों को केंद्र सरकार द्वारा 'आरक्षित रकम' का भुगतान करना होगा, जो कोयला मंत्रालय द्वारा अधिसूचित 'प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये कोयला खदानों की नीलामी के नियम 2012' के आधार पर तय की जाएगी। इस प्रक्रिया से प्राप्त होने वाली रकम संबंधित राज्य सरकारों के पास जाएगी। ऊर्जा मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि दो चरणों में बोली लगने के कारण कंपनी के लिए परियोजनाएं किफायती नहीं रहती हैं। पहले चरण में कंपनियों द्वारा बिजली की बिक्री के लिए दाम तय करने और दूसरी में कोयला ब्लॉक के आवंटन की खातिर बोली लगाई जाती है। इसलिए मंत्रालय ने बिजली कंपनियों के लिए दाम आधारित बोली की मांग की थी।


मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'नए नियम मौजूदा कानून के प्रावधानों के आधार पर ही बनाए गए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि कोयला ब्लॉक की नीलामी के नए नियमों के तहत बिजली कंपनियों को खदान पहले ही दिखा दी जाएगी, जिससे वे अपना मार्जिन बचाते हुए बिजली मूल्य बता सकें ।


निजी बिजली उद्योग इस रियायत से काफी संतुष्ट है। उद्योग के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा, 'इस कदम से बिजली कंपनियों को मदद मिलेगी। लेकिन हाल ही में नीलामी को लेकर उच्चतम न्यायालय के रुख को देखते हुए इसे लागू करना आसान नहीं होगा।' विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार बिजली कंपनियों को राहत देते हुए भी विवादों से बच सकती है बशर्ते वह पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए। डेलॉयट टचे तोहमत्सु के वरिष्ठ निदेशक अमृत पांडुरंगी कहते हैं, 'अगर सरकार यह सुनिश्चित कर सके कि उन्हीं कंपनियों को आवंटन किया जाए, जिनकी परियोजनाएं शुरू होने वाली हैं या फिर जो कंपनियां प्रतिबद्घता जताती हैं, तो कोई विवाद नहीं होना चाहिए।'


कोयला खनन परियोजनाओं से जुड़ी विवादित नो-गो वर्गीकरण व्यवस्था को औपचारिक तौर पर समाप्त किए जाने के संबंध में कोयला मंत्रालय ने राज्यों से नो-गो इलाके  में फंसी परियोजनाओं को लेकर पर्यावरण मंत्रालय में संशोधित प्रस्ताव जमा कराने के लिए कहा है। बिजली, सीमेंट और इस्पात जैसी आधारभूत परियोजनाओं में पहले से ही 40,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है और इस फैसले के बाद इन परियोजनाओं को पूरा किए जाने में मदद मिलेगी।


पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के कार्यकाल में एक साल पहले इस तरह के वर्गीकरण (गो और नो गो इलाके) का प्रावधान किया गया था जिसके तहत नो-गो क्षेत्र में कोयला खनन को प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस प्रतिबंध के कारण इन परियोजनाओं का काम ठप हो गया। इस वर्गीकरण की वजह से 203 कोयला ब्लॉकों में मौजूद 66 करोड़ टन के सुरक्षित कोयला भंडार के खनन का काम स्थगित हो गया था। यहां मौजूद कोयले से 130,000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। नो-गो जोन में पडऩे वाले इन कोयला ब्लॉकों का आवंटन एनटीपीसी, कोल इंडिया, हिंडाल्को, एस्सार पावर और अदाणी समेत दो दर्जन से अधिक कंपनियों को किया था।


पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में कमी के कारण पिछले वर्ष दिसम्बर में देश के औद्योगिक उत्पादन में विकास की दर 1.8 फीसदी रही। नवम्बर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वृद्धि की दर 5.9 फीसदी थी। ताजा आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत प्रबल हो गए हैं जिस कारण नीति निर्माताओं पर इस गिरावट को रोकने के लिए कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि इन आंकड़ों से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर प्रमुख दरों में कटौती करने के लिए दबाव बढ़ गया है।


सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रिवान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 16.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।



प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन शेष वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था के सुधरने की आशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि जनवरी, फरवरी और मार्च में सुधार हो सकते हैं।"

--
Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

No comments:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...