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Sunday, June 21, 2015

ओवर रिप्रेजेंटेशन एवं योग-व्यायामः


ओवर रिप्रेजेंटेशन एवं योग-व्यायामः

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आशीष अंबानीः पापा, देखिए न ! SC-ST के स्टूडेंट्स का कम कट-ऑफ पर भी सलेक्शन हो जाता है...इसके लिए हम सवर्णों को भी समता का अधिकार चाहिए...मैं भी आईआईटी में पहुंच सकता था.

मुनेश अंबानीः बेटा, ये आलीशान बंगला, कंपनियां छोड़कर झुग्गी-झापड़ी में क्यूं जाना चाहता है? क्या तुम चाहते हो कि लोग तुम्हें अछूत समझें और तुम्हारे साथ जानवरों जैसा सलूक करें?

आशीष अंबानीः पापा, मैं आपका मतलब नहीं समझा.

मुनेश अंबानीः बेटा, वर्णव्यवस्था-जातिव्यवस्था के चलते हम लोग उनकी मेहनत पर मजे मारते आ रहे हैं, जबकि उन लोगों को अत्याचार और शोषण का सामना करना पड़ता है...विभिन्न धार्मिक-सामाजिक नियम बनाकर उन्हें वंचित रखा गया है, इसलिए वे लोग शैक्षणिक, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक रूप से बहुत ज्यादा पिछड़ गए हैं...आरक्षण के माध्यम से सभी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है और वैसे भी वे तो इस देश के मूलनिवासी हैं...ये राष्ट्र निर्माण की बातें हैं, तुम नहीं समझोगे मोटू! जाकर योग-व्यायाम करो.

आशीष अंबानीः जो भी हो, हमें भी समता का अधिकार चाहिए ही.

मुनेश अंबानीः अबे मोटे दिमाग के...समझ नहीं आता तुझे...मैं तेरे लिए इंटरनेशनल लेवल के स्कूल-कॉलेज खोल दूंगा...जो भी सुविधाएं चाहिए, उपलब्ध करा दूंगा...दसियों कंपनियां खुलवा दूंगा...तू उनकी जैसी सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक हैसियत की मांग करके क्या जिंदा रह पाएगा? तेरा तो नाश्ता भी बहुत मंहगा है...क्या तू सबकुछ छोड़ने को तैयार है, बोल?

आशीष अंबानीः पापा, मतलब मुझे सबकुछ छोड़कर उनके समान जिंदगी जीनी पड़ेगी? या फिर उन्हें अपने समान आने देना होगा?

मुनेश अंबानीः और नहीं तो क्या, समता का अधिकार का मतलब तू क्या सझता था, मोटे?

आशीष अंबानीः मुझे लगा कि सिर्फ परीक्षा में कट-ऑफ के लिए समानता की बात करनी चाहिए...तो शायद मैं भी आईआईटी में पहुंच सकूं, लेकिन ये बात इतनी मंहगी पड़ेगी, मुझे नहींं पता था.

मुनेश अंबानीः बेटा, संख्या में मुट्ठीभर होते हुए भी हम सवर्णों का प्रतिनिधित्व पहले से ही बहुत ज्यादा है, ओवर रिप्रिजेंटेशन है...अगर हम समता की बात करेगें तो, जो हमने तमाम संसाधनों पर कब्जा जमाया हुआ है, वो छोड़ना पड़ेगा...सबके साथ बांटकर खाना पड़ेगा...फिर जो तूने तोंद फुलाके रखी है, वो कैसे भरेगी, बोल.

आशीष अंबानीः इसका मतलब, समता के अधिकार के कारण SC-ST-OBC का उत्थान होना तय है...यानि की संविधान उन सभी को हमारे बराबर देखना चाहता है...पापा, ये तो बहुत ही गंदा संविधान है...कॉपी-पेस्ट है.

मुनेश अंबानीः मोटे, तेरी बुद्धि क्या घांस चरने गई है...संविधान ने सभी भारतीयों के हितों का ख्याल रखा है...सभी को सुरक्षा प्रदान की है...बस, हमें कुछ भी करके अपनी हेजेमनी बनाए रखनी है...अब तू जा, अपने हॉफ चड्डी वाले तोंदू अंकल के साथ योग-व्यायाम करके आ...बहुत चर्बी चढ़ गई है....और हां, शाखा जाना कभी मत भूलना. 
(नोटः वार्तालाप में प्रयुक्त नाम पूरी तरह काल्पनिक हैं, फिर भी अगर कोई मिलान होता है तो वो केवल संयोग माना जाएगा)
‪#‎OverRepresentedSavarn‬

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