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Monday, May 7, 2012

सिनी साय को रिहा करने की मांग

सिनी साय को रिहा करने की मांग



जनज्वार: विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन ने विज्ञप्ति जरी कर कलिंग नगर विस्थापन विरोधी आंदोलन की अपनी नेत्री सिनी साय की गिरफ्तारी की निंदा करता है. सिनी साय को ओडिशा पुलिस ने 3 अप्रैल, 2012 को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे दिमागी मलेरिया का इलाज करवा रही थी. सिनी साय पिछले कई सालों से कलिंगनगर और उसके आस पास के इलाके में विस्थापन विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं.  

विज्ञप्ति में कहा गया है कि, कलिंगनगर में टाटा स्टील प्लांट के खिलाफ आन्दोलन के दौरान उनका बेटा भगबान साय भी शहीद हुआ था. 2006 में हुए इस कुख्यात पुलिस गोलीकांड में उनके बेटे सहित 13 आदिवासियों शहीद हो गए थे जिन्होनें जल-जंगल-जमीन पर जनता का अधिकार कायम करने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी. इन्हीं शहीदों के सपने को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सिनी साय उम्रदराज होने के बावजूद खुद मैदान में उतर गई. साठ वर्ष की उम्र के बावजूद दो बार गोबरघाटी ग्राम पंचायत की मुखिया रह चुकी सिनी साय कलिंग नगर सहित आस पास के क्षेत्र में आंदोलन निर्मित करने में लगी गई. पिछले कई सालों से पुलिस उन्हें झूठे केसों में फंसाने पर अमादा थी तथा लगातार उन्हें तंग कर रही थी. पुलिस की तमाम धमकियों के बावजूद तथा उम्रदराज होने के बावजूद वे जल जंगल जमीन पर जनता का अधिकार कायम करने के आंदोलन में पुरी तरह सरगर्म थी. जल जंगल जमीन व प्राकृतिक सम्पदा को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को सौंप देने पर अमादा सरकार येन-केन-प्रकारेण सिनी साय जैसे जुझारू कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश कर रही है. ओडिशा पुलिस ने सिनी साय को गिरफ्तार कर उन पर दर्जनों फर्जी केस लाद दिए हैं, जिसमें हत्या करने, थाने पर हमला करने जैसे संगीन केस भी शामिल हैं.  

विज्ञप्ति में आगे लिखा है, ओडिशा पुलिस ने पिछले महिने अप्रैल में ही कलिंग नगर क्षेत्र के ही कार्यकर्ता अमीन महाराणा को भी फर्जी मुठभेड में मार दिया था. जनवरी 2011 में भी कलिंग नगर के ही टमटा क्षेत्र में दो नाबालिग बच्चियों सहित पांच लोगों की हत्या फर्जी मुठभेठ में कर दी थी. पुलिस ने इन बच्चियों के साथ बलात्कार भी किया गया था. जाजपुर व क्योंझर जिले में पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड में हत्या, कम्पनियों के गुंडों का हमले, कार्यकर्ताओं को झूठे केस में फंसाना रोजमर्रा की घटना बन गई है. इस राजकीय दमन व गिरफ्तारियों का एक ही मकसद है कि कलिंगनगर-क्योंझर के पुरे क्षेत्र को टाटा, जिंदल, निको जैसे औद्योगिक घरानों के हवाले कर दिया जाए और जनता खासतौर पर आदिवासियों को वहां से उजाड़ दिया जाए. सिनी साय की गिरफ्तारी सरकार की इसी जनविरोधी नीति का हिस्सा है. 

सिनी साय विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन की केन्द्रीय परिषद् की सदस्या हैं. 2007 में विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन के पहले सम्मेलन का उद्घाटन शहीद भगबान साय की मां व वरिष्ट नेत्री सिनी साय ने ही किया था. विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन मांग करता है कि सिनी साय को तुरन्त बेशर्त रिहा किया जाए और उन पर बनाए गए सारे केस वापिस लिए जाए. उनके इलाज का समुचित प्रबंध किया जाए.  कलिंग नगर क्षेत्र सहित सारे ओडिशा में विस्थापन बंद किया जाए और कम्पनियों के साथ किए गए सारे एमओयू रद्ध किए जाए. साथ ही जल जंगल जमीन व प्राकृतिक सम्पदा पर जनता का अधिकार सुनिश्चित करते हुए उनके प्रयोग का अधिकार जनता के हवाले किया जाए. 

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