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Thursday, April 12, 2012

रिक्टर स्केल के इस फर्जीवाड़ा की आखिर जरुरत क्यों पड़ी ?

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रिक्टर स्केल के इस फर्जीवाड़ा की आखिर जरुरत क्यों पड़ी ?

रिक्टर स्केल के इस फर्जीवाड़ा की आखिर जरुरत क्यों पड़ी ?

By  | April 12, 2012 at 9:35 am | No comments | आजकल

  • आखिर रिक्टर स्केल, दहशत और भरोसे के इस नायाब खेल से फायदा किसे है?
  • सचमुच सुनामी आ जाता तो क्या होता?

पलाश विश्वास

आप आश्वस्त हो सकते हैं। भारत अब परमाणु महाशक्ति है और भूकंप या सुनामी से हमें कोई खतरा नहीं है। चीखते चैनलों की खबरों के बीच हम अभी ८.७ और ८.४ रेक्टर स्केल की दहशत से दहलते हुए अगले झटकों की आशंका से पसीना पसीना हो ही रहे थे कि सरकार ने सुनामी अलर्ट जारी कर दी और उठा भी ली। देर रात तक पैनल और विशेषज्ञ हमें यह समझाते रहे कि यहां जापान जैसे हादसे की गुंजाइश नहीं है और इतना पुखता इंतजाम है कि हम बाकायदा परमाणु पागलपन में निष्णात रह सकते हैं। चाकचौबंद इंतजामात का हाल यह रहा कि भारतीय मौसम विभाग कोई पूर्व सूचना तो दे नहीं पाया, पर उसके अफसरान चैनलों में पधारकर लोगों को बचा लेने का दावा करते रहे। गनीमत है कि चैनलों की चीखती खबरों के विपरीत झटके उतने जोरदार नहीं थे। कोलकाता में तो चैनल ८.७ और ८य४ रेक्टर स्केल से नीचे उतर ही नहीं रहा। मानों कि प्रोमोटरों और बिल्डरों के लिए माकूल माहौल बनाने की प्रतिद्वंद्विता हो कि कितना सुरक्षित है अंधाधुंध निर्माण और सीमेंट का बढ़ता हुआ जंगल। रिक्टर स्केल के इस फर्जीवाड़ा की आखिर जरुरत क्यों पड़ी? आखिर रिक्टर स्केल, दहशत और भरोसे के इस नायाब खेल से फायदा किसे है? भूकंप के झटके दक्षिण भारत के चेन्नई, बंगलूरू, तिरुवनंतपुरम सहित अन्य कई शहरों में महसूस किए गए।समंदर के तटों के आसपास के इलाके खाली करवाने की चर्चा शुरू हो गई थी। मगर, बाद में सूनामी की चेतावनी वापस लेने की खबर आने के बाद लोगों ने राहत महसूस की।चेन्नई के मरीन बीच रोड के आसपास के इलाकों को चौकस कर दिया गया।कुडंकुलम परमाणु केंद्र से लगे इलाकों में भी सुनामी अलर्ट जारी किया गया था।सचमुच सुनामी आ जाता तो क्या होता?ग़ौरतलब है कि वर्ष 2004 में इन्हीं इलाकों में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें सिर्फ सुमात्रा इलाके में करीब एक लाख 70 हज़ार लोग काल के गाल में समा गए थे। साल 2004 की सुनामी में भारत, श्रीलंका और थाईलैंड समेत पूरे हिंद महासागर से जुड़े 13 देशों में कुल दो लाख 30 हज़ार लोग मारे गए थे।

हमें तो दरअसल भूकंप का कोई झटका महसूस नहीं हुआ। बगल के डा. रायचौधरी के घर में सविता थी और वहीं से चिल्लायी कि डाक्टर साहब के घर में भूकंप आ गया। मैंने समझा मजाक है और  हम लगे रहे। करीब तीन बजे सविता ने आकर सूचना दी कि कोलकाता में भूकंप आया है। तब जाकर हमने टीवी खोला।कोलकाता में भूकंप के झटके दिन में 2 बजकर 10 मिनट पर महसूस किए गए। अलग-अलग जगहों पर भूकंप की अवधि 30 सेकेंड से लेकर 1 मिनट तक रही। इंडोनेशिया में इतना तेज भूकंप आया कि कई देशों में झटके महसूस किए गए। भारत में भी कई शहरों में भूकंप से अफरातफरी फैली। पूरी अफरा तफरी मची हुई थी।महिलाएं तो इतनी डर गयीं कि काम से घर लौटने की हिम्म्त नहीं जुटा पा रही थीं।भूकंप के झटके शहर के कई हिस्सों, विशेषकर लेक टाउन, सॉल्ट लेक और पार्क स्ट्रीट में महसूस किए गए। कोलकाता से लगे उत्तरी 24 परगना और उत्तरी बंगाल के सिलीगुड़ी में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। मेट्रो बंद हो गया। शहर में मेट्रो ट्रेन सर्विस 2:42 बजे से रोक दी गई और कई स्टेशनों से यात्रियों को निकलने के लिए कहा गया। स्क्रीन पर दरारें दिखायी जाती रहीं। पार्क स्ट्रीट में कुछ इमारतों में दरारें देखी गई। विशषज्ञों और संवाददाताओं के बीच भूकंप से दहशत फैलाने की​ ​ प्रतिद्वद्विता छिड़ी हुई थी। लोग दफ्तरों और घरों से निकलकर बाइट दे रहे थे।उनकी आंखों में 2004 में आई उस सुनामी की विनाशलीला के भयावह दृश्य नाचने लगे, जिसमें 14 देशों के दो लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे। पर कहीं किसी को नुकसान नहीं हुआ। पिर फिर भूकंप के झटके आते रहने की चेतावनी से सावधान सविता जरूर टीवी से चिपकी रही। बाकी घरों में भी यकीनन ऐसा ही हुआ होगा। जितने बड़े भूकंप की खबर फैलायी गयी, उससे तो लग रहा कि कहीं भी कुछ साबूत न बचा होगा। मजे की बात है कि दिनभर जिस मकान को भूकंप प्रभावित और उसमें दरारें दिखायी जाती रहीं,उसी चैनल पर संवाददाता ने शाम को इसे अफवाह बता दिया और कहा कि दरारें पहले से मौजूद हैं। तो यह कमाल है सरिया की मजबूती  और  विज्ञापनों का, पेज पेज भर णखड़ा विज्ञापन नये नये लक्जरी बहुमंजिली आवासन का।मौसम विभाग के क्षेत्रीय केंद्र कोलकाता के निदेशक जी. सी. देबनाथ ने कहा, 'हां भूकम्प के झटके यहां भी महसूस किए गए, जिसका केंद्र सुमात्रा में था।'आधिकारिक बयान में कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की सरकार और सभी पूर्वी तटीय राज्यों से कहा है कि वे 'तटीय अलर्ट' जारी करें।

सुमात्रा द्वीप आज रिक्टर स्केल पर 8.6 तीव्रता के भूकंप से हिल उठा। इंडोनेशियाई प्रशासन ने बताया है कि भूकंप के बाद भूकंप के बाद आने वाले झटके (आफ्टरशॉक) महसूस किए गए हैं। इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.5 आंकी गई।लेकिन कोलकाता में बाद के भूकंप को ८.४ का बताया जाता रहा।भारत सरकार ने इंडोनेशिया में आए भूकंप को देखते हुए देश के नागरिकों से कहा कि उन्हें सुनामी की आशंका से चिंतित या भयभीत होने की जरूरत नहीं है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने देश के नागरिकों विशेषकर तटीय इलाके में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे सुनामी से चिंतित न हो क्योंकि उसके भारत में आने की कोई आशंका नहीं है।  अमरीकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक उत्तरी सुमात्रा में आए इस भूकंप की तीव्रता 8.6 थी। पहले बताया जा रहा था कि इस भूकंप की तीव्रता 8.7 है लेकिन बाद में इसे कम करके आंका गया है। उत्तरी सुमात्रा के पश्चिमी तट पर एसे नाम की जगह पर समुद्र के अंदर 33 किलोमीटर भीतर भूकंप का केंद्र है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार भूकम्प का केंद्र 33 किलोमीटर की गहराई पर था। इंडोनेशिया के साथ-साथ 28 देशों में इसके झटके महसूस किए गए हैं। लोगों ने ट्विटर पर भूकंप के झटकों के बारे में त्वरित प्रतिक्रिया दी है।

हम भूकंप से हालांकि बहुत डरते रहे हैं। हिमालय की हालत जानते हुए बाकायदा चिपको आंदोलन के जरिये चेताते रहे। टिहरी बांध का​
​ विरोध करते रहे। नवंबर १९९१ को जिस रात को हम बरेली से कोलकाता कोलकाता के लिए ट्रेन से रवाना हुए थे, उस रात को गढ़वाल में भूकंप से भारी तबाही मची थी। कोलकाता आने से पहले सबकी खैरियत पता करना, वह भी अखबारों से, मुश्किल ही था। तब न तो मोबाइल हर हाथ में था और न ही इतने सारे टीवी चैनल। फिर भी हम इतनी दहशत में नहीं थे, जितनी दहशत में सही सलामत कोलकाता को आज देखा। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया में बुधवार को आए भूकम्प से सुनामी का खतरा बहुत कम है। 'बीबीसी' के अनुसार, अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण से जुड़े ब्रश प्रेसग्रेव ने कहा कि भूकम्प की प्रकृति को देखते हुए नहीं लगता कि इससे सुनामी का खतरा होगा। उन्होंने बताया कि पृथ्वी क्षतिज दिशा में घूमती है, न कि ऊध्र्वाकार दिशा और इसलिए सुनामी का खतरा कम है। इसकी आशंका हालांकि पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती।भूकम्प के बाद 28 देशों में सुनामी का एलर्ट जारी कर दिया गया है, जिनमें श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, थाईलैंड, मालदीव, ब्रिटेन, मलेशिया, मॉरीशस, सेशल्स, पाकिस्तान, सोमालिया, ओमान, मैडागास्कर, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, बांग्लादेश, तंजानिया, मोजाम्बिक, केन्या, दक्षिण अफ्रीका और सिंगापुर शामिल हैं।

सिस्‍मोलॉजी विभाग के निदेशक आरएस दत्‍तात्रेय ने कहा कि इंडोनेशिया में दोपहर 2,09 बजे 8.6 तीव्रता का भूकंप आया, इसका केंद्र सुमात्रा के उत्‍तर में था। उन्‍होंने कहा कि तटीय राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और मछुआरों को समुद्र में जाने की योजना स्थगित करने को कहा गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में लोगों को तटीय क्षेत्रों को खाली कर भीतर आने को कहा गया है। महाराष्ट्र या मुंबई में किसी तरह के भूकंप से मौसम विभाग ने इनकार किया है। विभाग के मुताबिक अरब सागर में 155 किलोमीटर दूर और 33 किलोमीटर अंदर भूकंप आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 नापी गई है। अंडमान निकोबार द्वीप पर लोगों को ऊंची जगह पर जाने को कहा गया है। नाविकों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई।

दत्तात्रेय ने कहा कि कि झटकों के बाद झटका संभव है, लेकिन अभी कोई तात्कालिक खतरे की बात नहीं है। हालांकि, मौसम विभाग ने बताया कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु में दोबारा झटकों को महसूस किया गया।

पलाश विश्वास, लेखक स्वतंत्र पत्रकार, चिन्तक व साहित्यकार हैं

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